INS Vikrant को भारतीय सेना में शामिल किया गया

INS Vikrant

2 सितम्बर 2022 का दिन भारत के इतिहास में हमेशा याद रखा जायेगा | इस दिन भारतीय नौसेना में INS Vikrant को शामिल किया गया | इस युद्धपोत के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना पहले से अधिक शक्तिशाली हो गयी है | 

हम अपने इस आर्टिकल में आपको आईएनएस विक्रांत की खूबियों से रूबरू कराएंगे | कृपया आर्टिकल को पूरा पढ़े |

INS Vikrant का इतिहास 

यह जहाज सबसे पहले ब्रिटिश रॉयल नेवी के लिए 14 अक्टूबर, 1943 को बनाया गया | उस समय इसे हरक्यूलिस के नाम से जाना जाता था | 

द्रितीय विश्व युद्ध के बाद सन 1957 में भारत ने ब्रिटिश रॉयल नेवी से INS Vikrant को खरीद लिया | 

लगभग 4 वर्षो की मरम्मत के बाद इसे सन 1961 में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया | 

जिसके जश्न में सेना द्वारा कमीशन इवेंट का आयोजन किया गया | इस इवेंट में उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे |

भारत-पकिस्तान युद्ध में अहम भूमिका निभाई   

सन 1971 में पाकिस्तान ने भारत के INS Vikrant को ध्वस्त करने के हर सम्भव प्रयास किये | 

पाकिस्तान को यह पता था कि इस युद्धपोत के कारण वह भारत पर कभी भी आक्रमण नहीं कर पायेगा | 

इसलिए उसने इस पर आक्रमण करने की योजना बनाई | पाकिस्तान ने अपनी सबमरीन गाजी को कराची से बंगाल की खाड़ी की तरफ रवाना कर दिया | 

यह बात की जानकारी भारतीय नौसेना के अधिकारियों को पता चल गयी | उन्होंने पाकिस्तान की  इस योजना पर पानी फेरने की योजना बनाई | 

बड़ी गुप्त तरीके से भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने विक्रांत को हटा कर इसकी जगह आईएनएस राजपूत को एक्टिव कर दिया | 

ताकि पाकिस्तान को लगे की बंदरगाह पर INS Vikrant ही है | अब बारी थी पाकिस्तान को सबक सीखाने की | भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन शुरु किया | जैसे ही पाकिस्तान की सबमरीन पीएनएस गाजी विशाखापट्नम पहुंची | 

आईएनएस राजपूत ने सबमरीन पर हमला करने के लिए दो डेप्थ चार्जर समंदर में गिरा दिए | पानी में एक बड़ा बिस्फोट होते ही गाजी पानी की अंदर डूब गयी | 

1971 के युद्ध में हर भारतीय के लिए यह पल गौरवान्वित कर देने वाला पल था |

आईएनएस विक्रांत की खासियत 

भारतीय नौसेना का यह युद्ध जहाज किसी अनमोल रत्न से कम नहीं है | इस जहाज में कई आधुनिक उपकरण शामिल है जिससे युद्ध के समय किसी देश के आक्रमण से बचा जा सके | INS Vikrant के बारे में कुछ खास बातें   इस प्रकार है

1) यह जहाज 262 मीटर लम्बा और चौड़ाई 62 मीटर चौड़ा है | इसका वजन लगभग 45000 टन है | 

2) इस जहाज में 18 फ्लोर, 14 डेक और 2300 कम्पार्टमेंट है | 

3) यह जहाज इतनी बिजली पैदा कर सकता है जिससे लगभग 500 घरों में बिजली पहुंच सके |  

4) भारत का यह स्वदेशी जहाज लगभग 1500 सैनिको को ढो सकता है | 

5) इस जहाज की किचन में 10000 रोटियां बनाई जा सकती है | 

6) आईएनएस विक्रांत को इंडियन नेवी के इन हाउस वाटरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया | 

7) INS Vikrant दो फुटबॉल मैदान से भी अधिक बड़ा है | 

8) यह जहाज MIG-29K फाइटर जेट, MH-60R मल्टीरोल हेलीकॉप्टर, Kamov-31 एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर और कॉम्बेट एयरक्राफ्ट जैसे 30 एयरक्राफ्ट ढो सकता है | 

9) इस जहाज के अंदर 250 फ्यूल टैंकर और 2400 कम्पार्टमेंट है | 

10) भारतीय नौसेना का आईएनएस विक्रांत लगभग 20000 करोड़ रुपए के निवेश से बनाया गया है |

INS Vikrant

भारतीय नौसेना में  INS Vikrant के अलावा अन्य युद्धपोत  

1) आईएनएस विराट

 इस पोत को 18 नवंबर 1959 रॉयल नेवी (ब्रिटिश नौसेना) में शामिल किया गया | पहले इस पोत का नाम एम एस हर्मस था | 

यह युद्धपोत भी INS Vikrant की तरह सेना के लिए देवदूत बना | सन 1986 में भारतीय नौसेना ने कई देशों के युद्धपोतों की समीक्षा करने के बाद इसे रॉयल नेवी से खरीद लिया | 

इसे खरीदने के बाद इसके तकनीकी सुधार और रखरखाव के लिए इसे देवनपोर्ट डॉकयार्ड पर भेजा गया | लगभग 1 दसक के बाद भारतीय नौसेना ने इसे आधिकारिक रूप में सम्मिलित कर लिया | 

इस युद्धपोत में 12 डिग्री कोण का स्की जंप लगा है | जो लड़ाकु वायुयानों को उड़ान भरने में मदद करता है | 

पोत में 18 लड़ाकू वायुयान एक साथ रखे जा सकते है | पोत पर 750 लोगों के रहने की जगह है |

2 ) आईएनएस गोदावरी 

 INS Vikrant और अन्य युद्धपोतों की तरह आईएनएस गोदावरी ने भी भारतीय नौसेना के लिए अहम् भूमिका निभाई है | 

इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई में किया गया अर्थात यह युद्धपोत पूरी तरह से स्वदेशी है | भारतीय नौसेना में इस युद्धपोत का सेवा कार्यकल 10 दिसंबर,1983 से 23 दिसंबर 2015 तक रहा |

नौसेना में रहते हुए इसने कैक्टस,जुपिटर, बोल्स्टर, शील्ड आदि ऑपरेशनों को सफल किया |

INS Vikrant के मिशन

आईएनएस विक्रांत का मुख्य कार्य भारत के पड़ोसी देशों के आक्रमण से भारत की सुरक्षित रखना है | तथा किसी आपदा प्रबंधन में सहयता के लिए सेना इसे उपयोग में लाती है |   

भारतीय नौसेना में वापसी पर विशेष आयोजन

INS Vikrant की भारतीय नौसेना में वापसी पर 2 सितम्बर 2022 को कोच्चि में विशेष आयोजन किया गया | 

इस समारोह के मुख्य अतिथि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी बने | मानयीय मोदी जी ने इस दिन भारतीय नौसेना का नया इनसेग्निया ‘ निशान ‘ दिया | 

इस युद्धपोत निर्माण के बाद भारत उन देशों में शामिल हो गया है | 

जो 40 हजार टन का एयरक्राफ्ट बनाने की क्षमता रखते है | भारत के अलावा वो पांच अन्य देश अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और इंग्लैंड हैं जो इस तरह के एयरक्राफ्ट बनाते है |

INS Vikrant का रनवे खास तकनीकी से लैस

भारतीय नौ सेना के आईएनएस विक्रांत का रनवे खास तकनीकियों से लेस है | इसे फ्लाई-डेक तकनीकी पर तैयार किया गया है | 

इस तकनीकी की मदद से छोटे रनवे से स्कीइंग के जरिये टेकऑफ किया जाता है | क्योंकि इसका रनवे 250 मीटर का ही है | 

इसलिए इस पर अरेस्टेड रिकवरी तकनीकी से फाइटर जेट्स को लैंड कराया जायेगा |

INS Vikrant का मोटो 

स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत का मोटो (आदर्श वाकय) ‘ जयेम सम युधि स्पर्धा ‘ है | इसे ऋग्वेद से लिया गया है | इस वाक्य का अर्थ है – “अगर मुझसे कोई लड़ने आया तो मैं उसे परास्त करके रहूँगा |  

इस नए आईएनएस विक्रांत को पुराने INS Vikrant का ही नाम दिया गया जिसने 1971 में पाकिस्तान की नापाक योजना को असफल किया था |

हम उम्मीद करते है कि हमारे इस आर्टिकल में आप आईएनएस विक्रांत की खूबियों से रूबरू हुए होंगे | हम आगे भी इसी तरह भारतीय नौ सेना के युद्धपोतों से जुड़ी जानकारियों को आपके मध्य लते रहेंगे | हमारा यह  आर्टिकल आपको कितना पसंद आया | आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार और सुझाव देना न भूलें | धन्यवाद |

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