रोंगटे क्यों खड़े होते हैं आखिर क्या कहता है इस पर विज्ञान ?

रोंगटे क्यों खड़े होते हैं

अभिषेक और जिम्मी एक फिल्म देख कर आ रहे थे। तभी बात करते हुए अभिषेक ने कहा की एक सीन में तो रोंगटे खड़े कर दिये। जिम्मी सोच में पड़ गया कि आखिर हमारे रोंगटे क्यों खड़े होते हैं ?

शरीर के रोंगटे खड़े हो जाना एक सामान्य क्रिया है और यह अक्सर तब होती है जब वह किसी चीज को देख कर चौक जायें या किसी बात को सुनकर अचंभित हो जाये।

इसी प्रकार किसी अंधेरी गली में जब कोई वस्तु अचानक से आपके पैर को छूकर गुजर जाये, तो आपको पूरे शरीर में झुरझुरी सी महसूस होती है।

वैसे ही, गर्मियों के मौसम में, जब आप धूप की तीखी गर्मी से एकाएक एयरकंडीशन रूम में पहुंचते हैं, तो आपको गूजबम्प्स का अहसास होता है।

सर्दियों में, अगर आप रजाई में बैठे हों और कोई आपको ठंडे हाथों से छू जाए, तो भी आपको वैसा ही अनुभव होता है। इन सभी क्रियाओं में इंसान के रोंगटे खड़े हो जाते है।

रोंगटे क्यों खड़े होते है ?

रोंगटे खड़े होने की प्रक्रिया शरीर के पाइलोइरेक्टर मसल्स के कारण होती है। यह प्रक्रिया आपके रोएं को थोड़ी देर में आपकी त्वचा से अलग कर देती है।

इससे बालों की जड़ों के पास उभार हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पाइलोइरेक्टर मसल्स रोएं से जुड़े होते हैं, जो संकुचित होते हैं और रोएं उभर आते हैं।

पाइलोइरेक्शन सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम द्वारा नियंत्रित होता है और यह एक स्वेच्छा प्रतिक्रिया है।

जानवरों के लिए यह क्रिया काफी फायदेमंद

विज्ञान के अनुसार गूसबंप्स जानवरों के लिए काफी फायदेमंद बताया गया हैं।

प्रोफेसर कीथ रीच के मुताबिक, जब गूसबंप्स होते हैं तो जानवरों के बाल फूलकर खड़े हो जाते हैं। ऐसे में, जब ठंडी जगहों पर रहने वाले जानवरों के रोएं खड़े होते हैं, तो उनके बालों के बीच हवा भर जाती है।

इससे उन्हें ठंड का अहसास काफी कम होता है। इसके साथ ही जब किसी जानवर के बाल फूलते हैं, वे वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं। इससे दूसरे जानवरों के लिए भय की स्थिति पैदा होती है और वे हमला करने के बजाय भाग जाते है।

रोंगटे का खड़ा होना हमारी भावनाओं से भी जुड़ा

आवाज सुनकर रोंगटे खड़े होने का कारण है कि इंसानों को आवाज और दृश्य के गहरे संबंध का अनुभव होता है।

फिल्मों में कई बार जब हम अप्रत्याशित सीन देखते हैं, तब हमें गूजबम्प्स होते हैं। इसी तरह, जब कोई हमारी उम्मीद से बेहतर गाता है, तो भी हमारे रोएं खड़े हो जाते हैं।

इसका कारण है कि हमारा भावनात्मक रिस्‍पांस उस सीन से जुड़ जाता है। आवाज से रोंगटे खड़े होने के लिए मानव मस्तिष्‍क का एक भाग, जिसे इमोशनल ब्रेन कहा जाता है, जिम्मेदार होता है।

तो अब आपको समझ में आया होगा की आवाज़ सुनकर भी आपके रोंगटे क्यों खड़े होते हैं?

खतरे की स्थिति में रोंगटे क्यों खड़े होते हैं ?

खतरे का अहसास होने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं क्योंकि दिमाग का ‘इमोशनल ब्रेन’ ऐसी ध्वनि पर भी प्रतिक्रिया करता है जो खतरे की संकेत करती है।

दिमाग को लगता है कि यह कोई साधारण ध्वनि नहीं है, बल्कि कोई आपत्तिजनक क्रिया है जिससे खतरा हो सकता है।

ऐसे में, जब तेज ध्वनि या ध्वनि में परिवर्तन होता है, तो रोएं खड़े हो जाते हैं। जब उच्च स्वरों की ध्वनि सुनाई देती है, तो भी रोएं खड़े हो जाते हैं।

हालांकि, कुछ ही समय बाद दिमाग प्रोसेस कर लेता है कि यह सिर्फ संगीत की ध्वनि है और फिर रोएं बैठ जाते हैं।

आशा करते है कि अब आपको पता चल गया होगा की मनुष्यों में रोंगटे क्यों खड़े होते हैं ? और इनका खड़ा होना क्यों जरुरी है।

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